🌙 🇮🇳 Jaipur, India

जयपुर में करवा चौथ 2026

गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 · Chaturthi

📅 Jaipur में इस दिन का समय

गणना हो रही है…

Jaipur के अक्षांश/देशांतर से गणना — IST नहीं

जयपुर, राजस्थान में करवा चौथ 2026 गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। भारत के भीतर भी जयपुर का सूर्योदय दिल्ली से थोड़ा अलग है, इसलिए पूजा और चंद्रोदय समय, चौघड़िया और राहु काल के समय एक सामान्य अखिल-भारतीय पंचांग से कुछ मिनट अलग पड़ते हैं। इस पेज पर नीचे दिया गया हर समय जयपुर के अनुसार गणना किया गया है।

जयपुर की गुलाबी दीवारों वाली गलियों में करवा चौथ आता है तो गोविंद देव जी मंदिर के आसपास की बाजारों में लाल और सोने का रंग छा जाता है, जहां महिलाएं अपने आंगन में एकत्र होती हैं, मिट्टी के बर्तन बांटती हैं और अपनी दादियों से सुनी कहानियां साझा करती हैं, उनकी चूड़ियां बजती रहती हैं। जयपुर की मशहूर हवेलियां दीपों की रोशनी और ताजी मेहंदी की खुशबू से जगमगाती हैं, जबकि युवा महिलाएं अपनी परंपरागत पोशाक में जयपुर के अक्टूबर के आकाश को पृष्ठभूमि में सेल्फी लेती हैं, सदियों पुरानी परंपरा को आधुनिक जीवन की गति से मिलाती हैं। जयपुर का यह उत्सव इसलिए खास है कि यह शहर के मजदूर-वर्गीय मुहल्लों और भव्य हवेलियों दोनों से गुजरता है, पूरे शहर को एक शांत भक्ति में बांधता है जो कालजयी और बिल्कुल इसी पल का है।

करवा चौथ का महत्व

करवा चौथ हिंदू धर्म का एक पवित्र और भावपूर्ण व्रत है, जो कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन स्त्रियाँ अपने पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, अर्थात् बिना जल और अन्न के सूर्योदय से चंद्रोदय तक उपवास करती हैं।

इस व्रत की जड़ें प्राचीन लोककथाओं और पौराणिक आख्यानों में गहरी हैं। सबसे प्रचलित कथा वीरवती की है, जो एक पतिव्रता स्त्री थीं और जिन्होंने विधिपूर्वक व्रत पालन कर अपने पति के प्राण बचाए थे। देवी पार्वती और भगवान शिव की भक्ति भी इस व्रत की आध्यात्मिक नींव मानी जाती है।

करवा चौथ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पति-पत्नी के प्रेम, समर्पण और विश्वास का उत्सव भी है। संध्याकाल में चंद्रमा को अर्घ्य देकर और पति के हाथों पानी पीकर व्रत तोड़ने की परंपरा इस पर्व को अत्यंत भावनात्मक और विशेष बनाती है।

शुभ मुहूर्त — और Jaipur में समय अलग क्यों

करवा चौथ का मुहूर्त कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर निर्धारित होता है। पूजा का शुभ मुहूर्त सामान्यतः सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में होता है, जब चंद्रमा उदित होने वाला होता है। इस दिन चंद्रोदय का समय सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण होता है, क्योंकि व्रत ठीक चंद्र-दर्शन के बाद ही तोड़ा जाता है। यदि चतुर्थी तिथि दो दिन पड़े, तो प्रदोष-व्यापिनी चतुर्थी, अर्थात् जिस दिन सूर्यास्त के बाद तिथि हो, उस दिन व्रत रखना शास्त्रसम्मत माना जाता है।

चंद्रोदय का सही समय हर स्थान की भौगोलिक स्थिति (अक्षांश और देशांतर) पर निर्भर करता है। पृथ्वी गोल है, इसलिए चंद्रमा हर जगह अलग-अलग समय पर उगता है, कुछ मिनट नहीं, बल्कि कभी-कभी एक घंटे तक का अंतर हो सकता है। इसीलिए किसी एक शहर का या IST (भारतीय मानक समय) आधारित एकसमान समय विदेश में रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए सही नहीं होगा। सटीक और फलदायी व्रत के लिए अपने निवास-स्थान का स्थानीय चंद्रोदय समय जानना अनिवार्य है।

करवा चौथ की रीति-रिवाज

करवा चौथ के दिन प्रातःकाल से लेकर चंद्रोदय तक कई महत्त्वपूर्ण रीति-रिवाज़ निभाए जाते हैं, जो इस व्रत को पूर्ण और फलदायी बनाते हैं,

  • सरगी ग्रहण करना: व्रत के दिन सूर्योदय से पहले सास द्वारा दी गई सरगी (मिठाई, फल, मेवे, सेंवई आदि) खाकर व्रत का संकल्प लिया जाता है। यही दिन का अंतिम भोजन होता है।
  • निर्जला उपवास: सूर्योदय के बाद पूरे दिन बिना जल और अन्न के व्रत रखा जाता है। श्रद्धा और संयम इस उपवास की आत्मा हैं।
  • श्रृंगार और सोलह शृंगार: व्रती महिलाएँ पारंपरिक वस्त्र (प्रायः लाल या गुलाबी), मेहँदी, चूड़ियाँ, बिंदी, सिंदूर आदि सोलह श्रृंगार करती हैं।
  • करवा चौथ की कथा सुनना: संध्याकाल में महिलाएँ एक साथ बैठकर करवा चौथ की व्रत-कथा सुनती हैं। थाली में करवा (मिट्टी का छोटा घड़ा), दीपक, फल, और मिठाई रखी जाती है।
  • छलनी से चंद्रमा और पति का दर्शन: चंद्रोदय के बाद छलनी में से पहले चंद्रमा को और फिर पति का मुख देखा जाता है, यह इस पर्व का सबसे भावपूर्ण और प्रतीकात्मक क्षण है।
  • चंद्रमा को अर्घ्य देना: छलनी से दर्शन के बाद जल, दूध या दोनों से चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है और चंद्र देव से पति की दीर्घायु की प्रार्थना की जाती है।
  • पति के हाथों व्रत तोड़ना: अंत में पति अपनी पत्नी को जल और मिठाई या भोजन कराकर व्रत तुड़वाते हैं। यह क्षण पारस्परिक प्रेम और सम्मान का प्रतीक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करवा चौथ का व्रत कौन रख सकती हैं?

यह व्रत मुख्यतः विवाहित हिंदू महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु के लिए रखती हैं; कुछ परंपराओं में मंगेतर और आधुनिक परिवारों में पति भी पत्नी के लिए व्रत रखने लगे हैं।

क्या करवा चौथ का व्रत बिना पानी के रखना ज़रूरी है?

हाँ, परंपरागत रूप से यह निर्जला व्रत है, सूर्योदय से चंद्रोदय तक जल और अन्न दोनों का त्याग किया जाता है; स्वास्थ्य कारणों से चिकित्सक की सलाह पर जल लिया जा सकता है।

अगर बादल हों और चाँद न दिखे तो क्या करें?

यदि चंद्रमा बादलों के कारण दिखाई न दे, तो थोड़ी प्रतीक्षा करें; बादल हटने पर चंद्र-दर्शन करें, या परिवार के बड़े-बुज़ुर्गों की सलाह लेकर किसी वैकल्पिक परंपरागत विधि से व्रत पूर्ण करें।

करवा चौथ के लिए सही चंद्रोदय समय कैसे जानें?

चंद्रोदय का समय आपके शहर की भौगोलिक स्थिति के अनुसार बदलता है, इसलिए किसी विश्वसनीय पंचांग या ज्योतिषीय कैलेंडर पर अपना स्थान चुनकर स्थानीय चंद्रोदय समय देखें।

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