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अहमदाबाद में गणेश चतुर्थी 2026

सोमवार, 14 सितंबर 2026 · Chaturthi

📅 Ahmedabad में इस दिन का समय

गणना हो रही है…

Ahmedabad के अक्षांश/देशांतर से गणना — IST नहीं

अहमदाबाद, गुजरात में गणेश चतुर्थी 2026 सोमवार, 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। भारत के भीतर भी अहमदाबाद का सूर्योदय दिल्ली से थोड़ा अलग है, इसलिए मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त, चौघड़िया और राहु काल के समय एक सामान्य अखिल-भारतीय पंचांग से कुछ मिनट अलग पड़ते हैं। इस पेज पर नीचे दिया गया हर समय अहमदाबाद के अनुसार गणना किया गया है।

अहमदाबाद की पुरानी शहर की गलियों में गणेश चतुर्थी मिट्टी की मूर्तियों और फूलों की माला का त्योहार बन जाता है, कंकारिया झील के पंडाल हज़ारों लोगों को आकर्षित करते हैं जो पानी के किनारे पैदल चलते हुए भीड़ को दोगुना करते हैं। शहर के जैन मंदिर और पड़ोस के देवालय विस्तृत सजावट में प्रतिस्पर्धा करते हैं, जबकि परिवार मणिनगर और सैटेलाइट की रसोई में मोदक और खिचड़ी तैयार करते हैं, सितंबर की गर्मी त्योहार के शाम के विसर्जन को एक सामूहिक राहत बना देती है। अहमदाबाद की गणेश पूजा अन्य जगहों के화भव्य समारोहों के विपरीत, स्थानीय कारीगरों के हाथों में निहित रहती है और आवासीय यार्डों से गूंजने वाली लयबद्ध मंत्रध्वनि में।

गणेश चतुर्थी का महत्व

गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। पुराणों के अनुसार माता पार्वती ने अपनी शक्ति से बालक गणेश को उत्पन्न किया और उनकी रक्षा का दायित्व उन्हें सौंपा। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मध्याह्न बेला में उनका प्राकट्य हुआ था, इसीलिए यह दिन संपूर्ण विश्व के हिंदू समाज में अत्यंत पवित्र और हर्षोल्लास से भरा माना जाता है।

गणेश जी को प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और बुद्धि-समृद्धि के देवता कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य का आरंभ उनकी वंदना से होता है क्योंकि वे समस्त बाधाओं को दूर करते हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उनका हाथी-मुख, विशाल उदर और टूटा हुआ दाँत, ये सभी प्रतीक जीवन की गहरी सीखें समेटे हुए हैं।

यह पर्व केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, परिवारों में मूर्ति की स्थापना से लेकर डेढ़, पाँच, सात या ग्यारह दिनों तक भव्य पूजा-अर्चना होती है और अंत में विसर्जन के साथ भक्त गणपति बप्पा को अगले वर्ष फिर आने का निमंत्रण देते हैं। यह भावना, "गणपति बप्पा मोरया, पुढ़च्या वर्षी लवकर या", इस पर्व की आत्मा है।

शुभ मुहूर्त — और Ahmedabad में समय अलग क्यों

गणेश चतुर्थी की पूजा के लिए सबसे शुभ समय मध्याह्न काल होता है, अर्थात् सूर्योदय और सूर्यास्त के ठीक बीच का मध्य भाग। शास्त्रों का स्पष्ट निर्देश है कि भगवान गणेश का प्राकट्य इसी बेला में हुआ था, इसलिए मूर्ति-स्थापना और प्रधान पूजा इसी खिड़की में करना सर्वश्रेष्ठ है। इसके अतिरिक्त, यदि चतुर्थी तिथि पर भद्रा का साया हो तो उसके समाप्त होने के बाद ही पूजा प्रारंभ करने का विधान है, क्योंकि भद्रा-काल को शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है।

मध्याह्न की सटीक घड़ी हर स्थान पर अलग-अलग होती है, क्योंकि यह उस दिन के स्थानीय सूर्योदय पर आधारित होती है, जो देशांतर (longitude) के अनुसार बदलती है। यही कारण है कि भारतीय मानक समय (IST) पर आधारित कोई एक समय विदेश में या यहाँ तक कि देश के अलग-अलग शहरों में भी सही नहीं हो सकता। सही मुहूर्त जानने के लिए आपके स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त के आधार पर गणना अनिवार्य है, इसीलिए प्रत्येक नगर का अपना विशिष्ट मुहूर्त समय नीचे दिया जाता है।

गणेश चतुर्थी की रीति-रिवाज

गणेश चतुर्थी की पूजा एक सुनिश्चित विधि-क्रम से की जाती है ताकि भगवान गणेश का यथोचित स्वागत और सम्मान हो सके। घर-घर में श्रद्धा और उत्साह के साथ निम्नलिखित अनुष्ठान किए जाते हैं,

  • मूर्ति की स्थापना (प्राणप्रतिष्ठा): मध्याह्न काल में शुभ मुहूर्त देखकर मिट्टी या धातु की गणेश मूर्ति को स्वच्छ व सजे हुए स्थान पर स्थापित किया जाता है और वैदिक मंत्रों द्वारा प्राणप्रतिष्ठा की जाती है।
  • षोडशोपचार पूजा: आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि सोलह उपचारों से गणेश जी की विस्तृत पूजा की जाती है।
  • दूर्वा और लाल पुष्प अर्पण: गणेश जी को दूर्वा (दूब घास) की इक्कीस गाँठें और लाल रंग के फूल अत्यंत प्रिय हैं; इन्हें श्रद्धापूर्वक अर्पित किया जाता है।
  • मोदक का भोग: गणेश जी का सबसे प्रिय प्रसाद मोदक है, घर में नारियल-गुड़ के भरे मोदक बनाकर अथवा उखड़े के मोदक चढ़ाए जाते हैं।
  • गणेश अथर्वशीर्ष और आरती: गणपत्यथर्वशीर्ष का पाठ, गणेश चालीसा और "जय गणेश जय गणेश देवा" जैसी आरतियाँ गाई जाती हैं।
  • चंद्र-दर्शन वर्जना: इस दिन रात्रि में चंद्रमा को देखने से बचा जाता है क्योंकि पुराण में चंद्र को गणेश जी का श्राप मिला था; इस निषेध का पालन परिवार के सभी सदस्य करते हैं।
  • विसर्जन: पूजा की अवधि (डेढ़ दिन, पाँच दिन, सात दिन या ग्यारह दिन) पूरी होने पर भजन-कीर्तन और जुलूस के साथ मूर्ति को जल में प्रवाहित किया जाता है और अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना की जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणेश चतुर्थी पर मूर्ति किस सामग्री की होनी चाहिए?

शास्त्रों में मिट्टी (पार्थिव) की मूर्ति को सर्वश्रेष्ठ माना गया है क्योंकि वह विसर्जन के बाद जल में घुलकर पर्यावरण को हानि नहीं पहुँचाती; धातु की स्थायी मूर्ति भी पूजी जा सकती है लेकिन उसका विसर्जन नहीं किया जाता।

इस दिन चंद्रमा देखना क्यों वर्जित है?

पुराण-कथा के अनुसार चंद्रमा ने गणेश जी के स्वरूप पर हँसकर उनका उपहास किया था, जिससे गणेश जी ने उन्हें श्राप दिया। इस दिन चंद्र-दर्शन करने वाले पर मिथ्या कलंक लग सकता है, इसीलिए भक्त सूर्यास्त के बाद आसमान से नज़रें बचाते हैं।

क्या गणेश चतुर्थी पर उपवास रखना ज़रूरी है?

उपवास अनिवार्य नहीं है, परंतु इस दिन व्रत रखने का विशेष महत्त्व है। व्रती दिनभर फलाहार लेते हैं और मध्याह्न पूजा के बाद मोदक का प्रसाद ग्रहण करके व्रत तोड़ते हैं।

पूजा कितने दिनों तक करनी चाहिए, एक दिन या अधिक?

यह पूरी तरह परिवार की परंपरा और श्रद्धा पर निर्भर करता है। डेढ़ दिन (अनंत चतुर्दशी से पहले), पाँच, सात या ग्यारह दिन, सभी प्रचलित हैं; महत्त्वपूर्ण यह है कि जो अवधि चुनें उसे नियमपूर्वक और भक्तिभाव से पूरा करें।

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