गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। पुराणों के अनुसार माता पार्वती ने अपनी शक्ति से बालक गणेश को उत्पन्न किया और उनकी रक्षा का दायित्व उन्हें सौंपा। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मध्याह्न बेला में उनका प्राकट्य हुआ था, इसीलिए यह दिन संपूर्ण विश्व के हिंदू समाज में अत्यंत पवित्र और हर्षोल्लास से भरा माना जाता है।
गणेश जी को प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और बुद्धि-समृद्धि के देवता कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य का आरंभ उनकी वंदना से होता है क्योंकि वे समस्त बाधाओं को दूर करते हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उनका हाथी-मुख, विशाल उदर और टूटा हुआ दाँत, ये सभी प्रतीक जीवन की गहरी सीखें समेटे हुए हैं।
यह पर्व केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, परिवारों में मूर्ति की स्थापना से लेकर डेढ़, पाँच, सात या ग्यारह दिनों तक भव्य पूजा-अर्चना होती है और अंत में विसर्जन के साथ भक्त गणपति बप्पा को अगले वर्ष फिर आने का निमंत्रण देते हैं। यह भावना, "गणपति बप्पा मोरया, पुढ़च्या वर्षी लवकर या", इस पर्व की आत्मा है।