वाराणसी (काशी / बनारस) पृथ्वी का सबसे पुराना जीवंत शहर और हिंदू सभ्यता की आध्यात्मिक राजधानी है। 84 घाटों और काशी विश्वनाथ मंदिर में हर अनुष्ठान, प्रार्थना और तीर्थयात्रा काशी के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार होती है, यहीं वैदिक पंचांग प्रणाली विकसित और मानकीकृत हुई। काशी में शुभ कार्यों से पहले राहु काल से बचना विकल्प नहीं है, यह पवित्र कर्तव्य है।
वाराणसी जैसे पवित्र नगर में भी राहु काल के दौरान कुछ कार्यों से बचना बुद्धिमानी है। इस समय कोई नया व्यवसाय शुरू करना, किसी भी प्रकार के अनुबंध या समझौते पर हस्ताक्षर करना उचित नहीं माना जाता। विवाह, गृह प्रवेश, वाहन या संपत्ति की खरीद, और बैंक से ऋण लेने जैसे महत्वपूर्ण कार्य इस काल में न करें। लंबी यात्रा का शुभारंभ भी इस अवधि में टालना बेहतर रहता है।
राहु काल में वे कार्य बिना किसी चिंता के जारी रख सकते हैं जो पहले से चल रहे हैं, जैसे कार्यालय का नियमित काम या पढ़ाई। यह समय ध्यान, मंत्र जाप और प्रार्थना के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है, और राहु मंत्र "ॐ रां राहवे नमः" का जाप इस काल में विशेष फलदायी माना जाता है। घर के सामान्य कामकाज, सफाई, और भविष्य की योजनाएं बनाना या किसी विषय का अध्ययन करना पूरी तरह ठीक है। राहु के उपाय जैसे नीले फूल अर्पित करना या राहु से संबंधित दान इस समय करना शुभ माना जाता है।
हर शहर का राहु काल उसके अपने सूर्योदय से अलग निकलता है, इसलिए Varanasi के पास के शहरों का समय भी अलग है।
| Sarnath | 3:07 PM to 4:42 PM |
| Prayagraj | 3:12 PM to 4:47 PM |
| Ayodhya | 3:11 PM to 4:46 PM |
| Kushinagar | 3:04 PM to 4:39 PM |
25 प्रमुख भारतीय शहरों के लिए खगोलीय सटीक राहु काल समय।