राम नवमी हिंदू धर्म के सबसे पवित्र उत्सवों में से एक है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान विष्णु के सातवें अवतार, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्म अयोध्या में राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर हुआ था। यह दिन त्रेता युग की उस दिव्य घटना का स्मरण कराता है जब धरती पर धर्म की पुनर्स्थापना के लिए स्वयं परमात्मा ने मनुष्य रूप धारण किया।
शास्त्रों के अनुसार श्रीराम का जन्म ठीक मध्याह्न काल में, अर्थात् दोपहर के समय, हुआ था, जब सूर्य अपने उच्चतम बिंदु पर था। इसीलिए इस पर्व पर मध्याह्न की वेला को सर्वाधिक पूजनीय माना जाता है और उसी समय मुख्य पूजा-अर्चना संपन्न की जाती है।
राम नवमी केवल एक जन्मोत्सव नहीं, बल्कि सत्य, करुणा, धैर्य और मर्यादा के उन आदर्शों का उत्सव है जो श्रीराम के जीवन में मूर्त हुए। यही कारण है कि सदियों से यह पर्व पूरे भारतीय उपमहाद्वीप और विश्वभर के हिंदू समाज में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता आया है।