🪢 🇮🇳 Rishikesh, India

ऋषिकेश में रक्षा बंधन 2026

शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 · Purnima

📅 Rishikesh में इस दिन का समय

गणना हो रही है…

Rishikesh के अक्षांश/देशांतर से गणना — IST नहीं

ऋषिकेश, उत्तराखंड में रक्षा बंधन 2026 शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। भारत के भीतर भी ऋषिकेश का सूर्योदय दिल्ली से थोड़ा अलग है, इसलिए राखी बांधने का मुहूर्त, चौघड़िया और राहु काल के समय एक सामान्य अखिल-भारतीय पंचांग से कुछ मिनट अलग पड़ते हैं। इस पेज पर नीचे दिया गया हर समय ऋषिकेश के अनुसार गणना किया गया है।

ऋषिकेश में राखी बांधन का त्योहार घाटों को पवित्र धागों और भाई-बहन के रिश्तों की खुशियों से भर देता है, जहां परिवार मनसा देवी मंदिर और गंगा के किनारे एकत्रित होते हैं और पुजारियों की मंत्र-ध्वनि पानी पर गूंजती है। शहर के योग आश्रमों को सदस्य अपने भाइयों को राखी बांधने घर लौट आते हैं, फिर सड़कें मिठाई की दुकानों की मिठास से भर जाती हैं, जबकि मानसून की हवा राम नगर और स्वर्ग आश्रम की शांत गलियों में गुलाबों की खुशबू बिखेरती है। ऋषिकेश में इस उत्सव को अनोखा बनाता है कि यह प्राचीन परंपरा तीर्थ नगर की आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ मिलती है, जहां भटकते साधुओं को भी परिवार राखी बांधते हैं और वे उन्हें आशीर्वाद देते हैं।

रक्षा बंधन का महत्व

रक्षा बंधन हिंदू धर्म का एक पवित्र और भावपूर्ण त्योहार है, जो भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह के बंधन को समर्पित है। यह पर्व प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधकर उसकी दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करती है, और भाई अपनी बहन की सदैव रक्षा करने का वचन देता है।

पौराणिक कथाओं में इस त्योहार की गहरी जड़ें हैं। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, देवराज इंद्र की पत्नी शचि ने युद्ध में जाने से पूर्व उनकी कलाई पर रक्षा-सूत्र बाँधा था, जिससे उन्हें विजय प्राप्त हुई। एक अन्य आख्यान में भगवान विष्णु ने राजा बलि के द्वार पर वामन रूप धरा और लक्ष्मीजी ने बलि को राखी बाँध उन्हें "भाई" मानकर भगवान को वापस माँगा। ये कथाएँ रक्षा-सूत्र में निहित आस्था और संकल्प की शक्ति को दर्शाती हैं।

आधुनिक समय में रक्षा बंधन केवल सगे भाई-बहन तक सीमित नहीं रहा, बहनें अपने मित्रों, चाचा, मामा या जिसे भी "भाई" मानती हैं, उन्हें राखी बाँधती हैं। यह त्योहार प्रेम, विश्वास और कर्तव्य का एक जीवंत उत्सव है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी रिश्तों को और मज़बूत करता आया है।

शुभ मुहूर्त — और Rishikesh में समय अलग क्यों

रक्षा बंधन पर राखी बाँधने का सर्वोत्तम समय अपराह्न काल (दोपहर बाद का मध्य पहर) माना जाता है, जब पूर्णिमा तिथि पूरी तरह व्याप्त हो। इससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण है भद्रा काल से बचना, भद्रा एक अशुभ अवधि होती है जो पूर्णिमा तिथि के एक भाग में पड़ती है। शास्त्रों के अनुसार भद्रा में राखी बाँधना वर्जित है, इसलिए मुहूर्त की गणना में सबसे पहले भद्रा की समाप्ति देखी जाती है। भद्रा समाप्त होते ही, पूर्णिमा रहते हुए, अपराह्न या प्रदोष काल में राखी बाँधना अत्यंत शुभ माना जाता है।

यह मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय पर आधारित होता है, इसलिए एक ही तारीख पर अलग-अलग स्थानों पर राखी बाँधने का सही समय घंटों तक भिन्न हो सकता है। भारतीय मानक समय (IST) में दिया गया समय केवल भारत के मध्य क्षेत्र के लिए सटीक होता है; विदेशों में या भारत के पूर्वी-पश्चिमी छोर पर रहने वालों के लिए वह समय सही नहीं होगा। इसीलिए अपने नगर के अक्षांश-देशांतर के अनुसार गणना किया गया स्थानीय मुहूर्त ही सर्वाधिक विश्वसनीय और शास्त्रसम्मत होता है।

रक्षा बंधन की रीति-रिवाज

रक्षा बंधन की पूजा-विधि सरल, पर भावनाओं से भरपूर होती है। परिवार शुभ मुहूर्त में एकत्र होकर इन परंपराओं का पालन करता है:

  • थाली सजाना: पूजा की थाली में राखी, रोली (कुमकुम), अक्षत (चावल), दीपक, मिठाई और कभी-कभी नारियल रखा जाता है।
  • भाई का आसन ग्रहण: भाई पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठता है; बहन उसके सामने खड़ी होती है।
  • तिलक लगाना: बहन भाई के माथे पर रोली और अक्षत से तिलक करती है और दीपक से आरती उतारती है, यह नज़र उतारने और मंगल-कामना का प्रतीक है।
  • राखी बाँधना: बहन भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बाँधती है और मन ही मन या बोलकर उसकी लंबी उम्र व खुशहाली की प्रार्थना करती है।
  • मिठाई खिलाना: बहन भाई के मुँह में मिठाई देती है; भाई भी बहन को मिठाई खिलाता है, यह उत्सव की मिठास और आपसी स्नेह का प्रतीक है।
  • भाई का उपहार और वचन: भाई अपनी बहन को उपहार, रुपए या आशीर्वाद देता है और जीवनभर उसकी रक्षा करने का संकल्प लेता है।
  • बड़ों का आशीर्वाद लेना: रस्म पूरी होने के बाद परिवार के बड़े-बुज़ुर्गों का आशीर्वाद लिया जाता है और मिलकर भोजन किया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भद्रा काल में राखी क्यों नहीं बाँधनी चाहिए?

भद्रा को अशुभ और विघ्नकारी अवधि माना जाता है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार इस काल में कोई भी शुभ कार्य, विशेषकर राखी जैसा पवित्र संकल्प, नहीं करना चाहिए, अन्यथा फल की प्राप्ति नहीं होती और अनिष्ट की आशंका रहती है।

यदि बहन और भाई एक-दूसरे से दूर हों तो राखी कैसे मनाएँ?

बहन डाक या कूरियर से राखी भेज सकती है; भाई शुभ मुहूर्त में उसे स्वयं अपनी कलाई पर बाँधे और वीडियो कॉल पर साथ में रस्म पूरी करें, भावना और संकल्प ही इस त्योहार की असली आत्मा है।

क्या राखी केवल सगे भाई को ही बाँधी जा सकती है?

नहीं, राखी चचेरे, ममेरे, फुफेरे भाइयों को और जिसे भी बहन "भाई" मानती हो, उन्हें बाँधी जा सकती है। यह रिश्ते की भावना का उत्सव है, रक्त-संबंध की अनिवार्यता नहीं।

पूर्णिमा तिथि दो दिन हो तो राखी किस दिन बाँधें?

जिस दिन पूर्णिमा तिथि अपराह्न काल में व्याप्त हो और भद्रा न हो, वह दिन राखी के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। स्थानीय पंचांग या ज्योतिषी से परामर्श लेकर सही तिथि निश्चित करें।

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