🌸 🇮🇳 London, United Kingdom

लंदन में शारदीय नवरात्रि 2026

रविवार, 11 अक्टूबर 2026 · Pratipada

📅 London में इस दिन का समय

गणना हो रही है…

London के अक्षांश/देशांतर से गणना — IST नहीं

लंदन, यूनाइटेड किंगडम में शारदीय नवरात्रि 2026 रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। लंदन का समय भारत से 4 घंटे 30 मिनट पीछे है, इसलिए यहाँ के स्थानीय सूर्योदय के अनुसार इस दिन के शुभ मुहूर्त, जैसे घटस्थापना (कलश) मुहूर्त, चौघड़िया और बचने योग्य राहु काल, भारतीय (IST) पंचांग में दिखाए गए समय से अलग पड़ते हैं। इस पेज पर नीचे दिया गया हर समय लंदन के अनुसार गणना किया गया है, ताकि आप पूजा, खरीदारी और उत्सव सही स्थानीय समय पर कर सकें, भारत के समय पर नहीं।

जब अक्टूबर की ठंडी हवाएँ लंदन की सड़कों पर दस्तक देती हैं, तो नीज़डन के स्वामीनारायण मंदिर और वेम्बली व हैरो के सामुदायिक हॉल गरबे की थिरकन, गेंदे के फूलों की खुशबू और प्रसाद की मिठास से भर उठते हैं, और कुछ पलों के लिए यह धुंधला शहर बिल्कुल अपना-सा लगने लगता है।

लंदन में बसे भारतीय मूल के हिंदू परिवारों के लिए नवरात्रि सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि उन जड़ों को थामे रखने का एक गहरा अवसर है, जहाँ चनिया-चोली पहनकर, हजारों मील दूर भी, माँ दुर्गा की आराधना में वही श्रद्धा और अपनापन झलकता है जो गुजरात या राजस्थान की गलियों में होता है।

शारदीय नवरात्रि का महत्व

शारदीय नवरात्रि हिन्दू पंचांग के अश्विन मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाने वाला नौ दिनों का पवित्र उत्सव है। यह पर्व आदिशक्ति माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों, शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री, की उपासना को समर्पित है। प्रत्येक दिन देवी के एक विशेष रूप की पूजा की जाती है, जो शक्ति, करुणा और ज्ञान के भिन्न-भिन्न आयामों का प्रतीक है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, महिषासुर नामक दैत्य ने तीनों लोकों में अत्याचार मचा रखा था। तब त्रिदेवों, ब्रह्मा, विष्णु और महेश, की सम्मिलित शक्ति से माँ दुर्गा का प्रादुर्भाव हुआ। नौ रातों और दस दिनों के भीषण युद्ध के पश्चात् माँ ने महिषासुर का वध किया और समस्त सृष्टि को भय से मुक्त किया। इसीलिए यह उत्सव बुराई पर अच्छाई की, अज्ञान पर ज्ञान की और अशक्ति पर शक्ति की विजय का उद्घोष है।

शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्त्व इसलिए भी है क्योंकि यह शरद ऋतु के आरम्भ में आती है, वह संधिकाल जब प्रकृति स्वयं परिवर्तन की दहलीज़ पर होती है। यही कारण है कि इन नौ दिनों में उपवास, जप, ध्यान और भक्ति के माध्यम से साधक अपनी आंतरिक शक्ति को जागृत करने का प्रयास करते हैं। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मोत्थान का अवसर भी है।

शुभ मुहूर्त — और London में समय अलग क्यों

घटस्थापना के लिए मुहूर्त का निर्धारण पंचांग की कई गणनाओं पर आधारित होता है। शास्त्रों के अनुसार घटस्थापना प्रतिपदा तिथि के प्रथम एक-तिहाई भाग में, अर्थात् दिन के पहले तीन मुहूर्तों में, करना सर्वोत्तम माना जाता है। यदि प्रतिपदा का प्रारम्भ सूर्योदय के बाद हो तो उसी दिन और यदि वह पूर्व रात्रि से चल रही हो तो सूर्योदय के उपरांत का पहला शुभ लग्न ग्रहण किया जाता है। इसके साथ ही चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में घटस्थापना वर्जित मानी जाती है, इसलिए इन दोनों का परहेज़ आवश्यक है। जब ये दोष न हों और शुभ लग्न उपलब्ध हो, उस संक्षिप्त समय-खिड़की को ही घटस्थापना का शुभ मुहूर्त कहा जाता है।

यह समझना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है कि यह मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय के समय पर निर्भर करता है। सूर्योदय हर स्थान पर अलग-अलग क्षण में होता है, पूर्व की ओर बसे नगरों में सूर्य पहले उगता है और पश्चिम की ओर बाद में। इसी कारण भारत के एक नगर का मुहूर्त किसी अन्य नगर से कुछ मिनटों का अंतर रख सकता है, और भारत से बाहर किसी अन्य देश में तो यह अंतर घंटों का हो सकता है। इसीलिए IST (भारतीय मानक समय) पर आधारित कोई एक निश्चित घड़ी का समय विदेश में रहने वाले भक्तों के लिए सही नहीं होगा। सदैव अपने स्थानीय सूर्योदय के अनुसार गणना किया गया मुहूर्त ही ग्रहण करें।

शारदीय नवरात्रि की रीति-रिवाज

नवरात्रि के प्रथम दिन यानी प्रतिपदा को घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है, जो पूरे नौ दिनों की साधना की नींव रखती है। इसके बाद प्रतिदिन विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। परिवार में सामान्यतः निम्नलिखित अनुष्ठान किए जाते हैं:

  • घटस्थापना / कलश स्थापना: शुभ मुहूर्त में मिट्टी या तांबे के कलश की स्थापना की जाती है। कलश में गंगाजल, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते रखे जाते हैं तथा उसके ऊपर नारियल रखकर उसे लाल वस्त्र से सजाया जाता है। कलश के पास जौ (जव) बोए जाते हैं जो नवमी तक अंकुरित होकर समृद्धि का प्रतीक बनते हैं।
  • माँ शैलपुत्री की पूजा: प्रतिपदा के दिन देवी के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की विशेष पूजा होती है। उन्हें सफ़ेद रंग के फूल और वस्त्र अर्पित किए जाते हैं।
  • अखंड ज्योति प्रज्वलन: अनेक भक्त घटस्थापना के साथ ही अखंड दीपक जलाते हैं जो नौ दिनों तक निरंतर प्रज्वलित रहता है। यह ज्योति माँ की उपस्थिति और घर में सतत शक्ति का प्रतीक मानी जाती है।
  • उपवास और सात्विक आहार: भक्त नौ दिनों तक व्रत रखते हैं। अनाज, प्याज़, लहसुन और मांसाहार का त्याग किया जाता है। कुट्टू, सामक चावल, साबूदाना और फलाहार ग्रहण किए जाते हैं।
  • दुर्गा सप्तशती / देवी पाठ: प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती के अध्याय, देवी कवच, अर्गलास्तोत्र तथा देवी के विभिन्न नामों का जाप किया जाता है। यह पाठ साधना का केंद्रीय अंग माना जाता है।
  • आरती और भोग: प्रातः और सायंकाल दोनों समय माँ दुर्गा की आरती की जाती है। देवी को उनके प्रिय भोग, जैसे हलवा, पूरी, खीर या उनके दिन-विशेष के अनुसार निर्धारित प्रसाद, अर्पित किया जाता है।
  • कन्या पूजन (अष्टमी / नवमी): अष्टमी या नवमी के दिन नौ कन्याओं को देवी के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर उनके पाँव धोकर, तिलक लगाकर और भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। यह अनुष्ठान नवरात्रि का अत्यंत भावपूर्ण और पवित्र क्षण होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवरात्रि में घटस्थापना क्यों की जाती है?

घटस्थापना माँ दुर्गा की शक्ति को कलश में आह्वान करने की विधि है। यह नौ दिनों की साधना का केंद्र बिंदु होता है और घर में देवी की दिव्य उपस्थिति स्थापित करता है।

क्या नवरात्रि व्रत में नमक खाया जा सकता है?

सेंधा नमक (rock salt) व्रत में ग्रहण किया जा सकता है क्योंकि इसे शास्त्रों में सात्विक माना गया है; साधारण आयोडीन युक्त नमक का परहेज़ किया जाता है।

यदि मुहूर्त के समय घटस्थापना न हो सके तो क्या करें?

यदि शुभ मुहूर्त किसी कारण चूक जाए तो अभिजित मुहूर्त (दोपहर का मध्य काल) में घटस्थापना की जा सकती है; सूर्यास्त के बाद स्थापना वर्जित है।

नवरात्रि में नौ देवियों के लिए कौन से रंग शुभ माने जाते हैं?

प्रत्येक दिन का एक शुभ रंग होता है, जैसे प्रतिपदा को ग्रे/स्लेटी, द्वितीया को नारंगी, तृतीया को सफ़ेद आदि; भक्त इन रंगों के वस्त्र पहनकर देवी की विशेष कृपा प्राप्त करते हैं।

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