नाग पंचमी हिंदू धर्म का एक पवित्र पर्व है जो श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन नाग देवताओं, विशेषतः अनंत, वासुकि, तक्षक, कालिया, पद्म और शेषनाग, की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन सर्पों की उपासना करने से परिवार को सर्पदंश का भय नहीं रहता और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना नदी में कालिया नाग का दमन किया था और उसे अभय देकर जीवनदान दिया था। इसके अतिरिक्त, महाभारत में जनमेजय के नागयज्ञ से नाग जाति की रक्षा की कथा भी इस पर्व से जुड़ी है। ये कथाएँ यह संदेश देती हैं कि प्रकृति के प्रत्येक प्राणी के साथ सामंजस्य और करुणा का भाव रखना चाहिए।
भारतीय संस्कृति में नाग को शिव के आभूषण, विष्णु की शैय्या और धरती के रक्षक के रूप में देखा जाता है। श्रावण मास में यह पर्व विशेष महत्त्व रखता है क्योंकि यह माह स्वयं भगवान शिव को प्रिय है और नाग उनके परम भक्त माने जाते हैं। इस प्रकार नाग पंचमी प्रकृति-पूजा, भक्ति और सांस्कृतिक परंपरा का एक सुंदर संगम है।