श्री कृष्ण जन्माष्टमी भगवान विष्णु के आठवें अवतार, योगेश्वर श्री कृष्ण के प्राकट्य उत्सव का पर्व है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को, रोहिणी नक्षत्र में, अर्धरात्रि के समय मथुरा के कारागार में देवकी और वसुदेव के घर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। यह क्षण सृष्टि के इतिहास में अद्वितीय है, जब परब्रह्म स्वयं मानव रूप में इस धरती पर उतरे।
श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, भक्ति, धर्म और कर्तव्य का सर्वोच्च आदर्श है। उन्होंने कंस जैसे अत्याचारी का नाश किया, अर्जुन को गीता का अमर ज्ञान दिया और भक्तों को सिखाया कि ईश्वर सदा अपने शरणागत की रक्षा करते हैं। जन्माष्टमी केवल एक जन्मदिन नहीं, बल्कि इस शाश्वत संदेश का उत्सव है।
इस पर्व का आध्यात्मिक महत्त्व अत्यंत गहरा है। रात्रि के बारह बजे, निशीथ काल, में जब सारा संसार सो रहा होता है, भक्त जागकर अपने प्रभु का स्वागत करते हैं। यह जागरण केवल शारीरिक नहीं, आत्मिक भी है, अज्ञान की नींद को तोड़कर, चेतना के प्रकाश में प्रवेश करने का प्रतीक।