होली हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा और उसके अगले दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को मनाया जाने वाला रंगों और उल्लास का महापर्व है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, भक्त प्रह्लाद की अटूट आस्था और भगवान विष्णु की कृपा से अहंकारी होलिका का दहन हुआ, और इसी घटना की स्मृति में होलिका दहन की परंपरा चली आ रही है।
अगले दिन धुलंडी (रंगवाली होली) मनाई जाती है, जब लोग एक-दूसरे पर गुलाल, अबीर और रंग डालकर प्रेम, सौहार्द और नवजीवन का स्वागत करते हैं। यह पर्व शिशिर ऋतु की विदाई और वसंत के आगमन का उत्सव भी है, प्रकृति जब नई कोंपलों और फूलों से सज उठती है, तब मनुष्य भी रंगों में डूबकर उसी आनंद को व्यक्त करता है।
होली केवल एक सामाजिक उत्सव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धि का अवसर भी है। होलिका की अग्नि में पुरानी कटुता, अहंकार और नकारात्मकता को जलाकर मन को नया करने की भावना इस पर्व के केंद्र में है। यही कारण है कि होली को "प्रेम और एकता का त्योहार" कहा जाता है।