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हनुमान जयंती 2027

मंगलवार, 20 अप्रैल 2027 · Purnima

हनुमान जयंती 2027 मंगलवार, 20 अप्रैल 2027 को है। इस पेज पर आपको हनुमान जयंती का महत्व, परिवारों द्वारा की जाने वाली रीति-रिवाज, सूर्योदय पूजा कैसे तय होता है, और आम सवालों के जवाब मिलेंगे। चूँकि शुभ समय स्थानीय सूर्योदय पर निर्भर करता है, इसलिए हम दुनिया भर के प्रमुख शहरों की स्थानीय तिथि और मुहूर्त भी देते हैं, ताकि विदेश में रहने वाले भारतीयों को अपने शहर का सही समय मिले, भारत के IST का नहीं।

हनुमान जयंती का महत्व

हनुमान जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी पावन तिथि को माता अंजना और पवनदेव के पुत्र, भगवान शिव के अंशावतार, श्री हनुमान जी का जन्म हुआ था। वे शक्ति, भक्ति और निःस्वार्थ सेवा के अद्वितीय प्रतीक हैं।

हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है, वे भक्तों के समस्त भय, रोग और कष्टों को हरने वाले देवता हैं। रामायण में उनकी भूमिका अतुलनीय है: सीता माता की खोज से लेकर लंका दहन तक, उनका हर कार्य श्रीराम के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण का जीवंत उदाहरण है।

चैत्र पूर्णिमा का दिन विशेष रूप से तेजोमय माना जाता है, पूर्णिमा की पूर्ण चंद्र ऊर्जा और हनुमान जी के जन्मोत्सव का संयोग इस दिन को आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी बनाता है। इस दिन की गई उपासना अनंत गुना फल देती है, ऐसा शास्त्रों में उल्लेख है।

शुभ मुहूर्त और स्थान का महत्व

हनुमान जयंती का शुभ मुहूर्त चैत्र पूर्णिमा तिथि के आरंभ और समाप्ति पर निर्भर करता है। पूजा के लिए सर्वोत्तम समय सूर्योदय के आसपास का काल माना जाता है, क्योंकि हनुमान जी का जन्म उदय वेला में हुआ था। यदि पूर्णिमा तिथि दो दिन तक व्याप्त हो, तो उदयतिथि को प्रधानता दी जाती है। इसके अतिरिक्त भद्रा काल का विशेष ध्यान रखा जाता है, भद्रा की अवधि में कोई भी शुभ कार्य वर्जित माना जाता है, इसलिए पूजा का समय भद्रा समाप्त होने के बाद ही निर्धारित करना चाहिए।

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि सूर्योदय का समय हर स्थान के अनुसार अलग-अलग होता है, यह आपके नगर के अक्षांश-देशांतर (latitude-longitude) पर निर्भर करता है। इसी कारण IST (भारतीय मानक समय) पर आधारित कोई एक सार्वभौमिक समय सभी स्थानों के लिए सही नहीं होता, और भारत से बाहर के देशों में तो यह पूर्णतः अमान्य हो जाता है। अपने नगर का सटीक मुहूर्त जानने के लिए स्थानीय सूर्योदय समय और पंचांग के आधार पर गणना करना आवश्यक है।

हनुमान जयंती की रीति-रिवाज

हनुमान जयंती पर भक्त ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान-ध्यान के पश्चात श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं। सूर्योदय का समय इस पर्व पर सबसे शुभ माना जाता है। परिवार में प्रचलित ये परंपरागत विधियाँ इस दिन विशेष रूप से की जाती हैं:

  • सूर्योदय से पहले स्नान: ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय से पूर्व स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें, लाल या केसरिया रंग के वस्त्र विशेष शुभ माने जाते हैं।
  • हनुमान जी का अभिषेक: मूर्ति या चित्र पर जल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें और तत्पश्चात सिंदूर तथा चमेली के तेल का लेप अर्पित करें।
  • हनुमान चालीसा का पाठ: गोस्वामी तुलसीदास रचित हनुमान चालीसा का एकाग्र भाव से पाठ करें, मान्यता है कि इस दिन इसका पाठ करने से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
  • सुंदरकांड का पाठ: रामचरितमानस के सुंदरकांड का सामूहिक या व्यक्तिगत पाठ करना इस दिन अत्यंत फलदायी माना जाता है; यह हनुमान जी की लंका-यात्रा और पराक्रम का वर्णन करता है।
  • भोग और प्रसाद: बूंदी के लड्डू, केला, गुड़-चना, पान और लाल फूल (गेंदा या गुलाब) हनुमान जी को अर्पित करें। तुलसी पत्र भी प्रिय मानी जाती है।
  • आरती और परिक्रमा: पूजा के अंत में हनुमान जी की आरती करें और मंदिर में तीन या पाँच परिक्रमा लगाएँ। परिक्रमा को अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
  • व्रत और दान: इस दिन व्रत रखने की परंपरा है। सायंकाल पूजन के पश्चात फलाहार ग्रहण करें और ब्राह्मणों तथा जरूरतमंदों को भोजन व दक्षिणा का दान करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमान जयंती और हनुमान जन्मोत्सव में क्या अंतर है?

दोनों एक ही पर्व के नाम हैं, चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जी के जन्म का उत्सव मनाया जाता है; कुछ क्षेत्रों में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को भी मनाते हैं, परंतु चैत्र पूर्णिमा सर्वाधिक प्रचलित और शास्त्रसम्मत तिथि है।

क्या हनुमान जयंती पर व्रत रखना अनिवार्य है?

व्रत अनिवार्य नहीं है, परंतु अत्यंत फलदायी माना जाता है; जो व्रत न रख सकें वे श्रद्धापूर्वक पूजा, हनुमान चालीसा पाठ और दान करके भी पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।

सुंदरकांड का पाठ इसी दिन क्यों किया जाता है?

सुंदरकांड हनुमान जी के पराक्रम, बुद्धि और भक्ति का सबसे विस्तृत वर्णन है; इसका पाठ उनके जन्मोत्सव पर करने से उनकी कृपा विशेष रूप से प्राप्त होती है और घर में सुख-शांति आती है।

हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है?

पौराणिक कथा के अनुसार माता सीता को सिंदूर लगाते देख हनुमान जी ने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया था, यह जानकर कि इससे श्रीराम की आयु बढ़ती है; तब से सिंदूर उनकी पूजा का अभिन्न अंग बन गया।

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