हनुमान जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी पावन तिथि को माता अंजना और पवनदेव के पुत्र, भगवान शिव के अंशावतार, श्री हनुमान जी का जन्म हुआ था। वे शक्ति, भक्ति और निःस्वार्थ सेवा के अद्वितीय प्रतीक हैं।
हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है, वे भक्तों के समस्त भय, रोग और कष्टों को हरने वाले देवता हैं। रामायण में उनकी भूमिका अतुलनीय है: सीता माता की खोज से लेकर लंका दहन तक, उनका हर कार्य श्रीराम के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण का जीवंत उदाहरण है।
चैत्र पूर्णिमा का दिन विशेष रूप से तेजोमय माना जाता है, पूर्णिमा की पूर्ण चंद्र ऊर्जा और हनुमान जी के जन्मोत्सव का संयोग इस दिन को आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी बनाता है। इस दिन की गई उपासना अनंत गुना फल देती है, ऐसा शास्त्रों में उल्लेख है।