गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला वह पावन पर्व है जो गुरु के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा का जीवंत उत्सव है। इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, वे महाभारत, श्रीमद्भागवत पुराण और वेदों के विभाजन के रचयिता हैं, इसीलिए इस पर्व को व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। वे समस्त मानवजाति के आदिगुरु माने जाते हैं।
हमारी परंपरा में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का समन्वित रूप कहा गया है, "गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः"। गुरु केवल विद्या नहीं देते, वे अज्ञान का अंधकार हटाकर ज्ञान का प्रकाश देते हैं। यह दिन उसी असीम ऋण को स्वीकार करने का अवसर है।
यह पर्व केवल शैक्षणिक गुरु तक सीमित नहीं है, आध्यात्मिक गुरु, जीवन-पथ दिखाने वाले माता-पिता और हर वह व्यक्ति जिसने हमें कुछ सिखाया, इस दिन सम्मान के पात्र हैं। पूर्णिमा का पूर्ण चंद्रमा इस भाव का प्रतीक है, जैसे चंद्रमा सूर्य का प्रकाश प्रतिबिंबित करता है, वैसे ही शिष्य गुरु के ज्ञान को जगत में फैलाता है।