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गुरु नानक जयंती 2026

मंगलवार, 24 नवंबर 2026 · Purnima

गुरु नानक जयंती 2026 मंगलवार, 24 नवंबर 2026 को है। इस पेज पर आपको गुरु नानक जयंती का महत्व, परिवारों द्वारा की जाने वाली रीति-रिवाज, प्रभात फेरी समय कैसे तय होता है, और आम सवालों के जवाब मिलेंगे। चूँकि शुभ समय स्थानीय सूर्योदय पर निर्भर करता है, इसलिए हम दुनिया भर के प्रमुख शहरों की स्थानीय तिथि और मुहूर्त भी देते हैं, ताकि विदेश में रहने वाले भारतीयों को अपने शहर का सही समय मिले, भारत के IST का नहीं।

गुरु नानक जयंती का महत्व

गुरु नानक जयंती, जिसे गुरपुरब भी कहा जाता है, सिख धर्म के संस्थापक और प्रथम गुरु, श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को उनका जन्म हुआ था, इसलिए यह पर्व कार्तिक पूर्णिमा के दिन श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। गुरु नानक देव जी का जन्म सन् 1469 में हुआ था और उन्होंने अपने जीवनकाल में एक ओंकार, ईश्वर की एकता, का संदेश पूरे संसार में फैलाया।

गुरु नानक देव जी ने जाति-पाँति, ऊँच-नीच और धार्मिक भेदभाव को नकारते हुए सेवा, सिमरन और सत्संग को जीवन का आधार बताया। उनकी वाणी, गुरबाणी, आज भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में सुरक्षित है और करोड़ों लोगों को प्रेरणा देती है। यह पर्व केवल सिख समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि हर वर्ग और हर धर्म के लोग इसे प्रेम और भाईचारे के पर्व के रूप में मनाते हैं।

कार्तिक पूर्णिमा की यह तिथि स्वयं में अत्यंत पावन मानी जाती है, इसी दिन देव दीपावली भी मनाई जाती है। इस तिथि पर जल, ज्योति और गुरुवाणी का संगम इस पर्व को आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण बनाता है। गुरपुरब का संदेश है, नाम जपो, किरत करो, वंड छको अर्थात् ईश्वर का नाम लो, ईमानदारी से कार्य करो और बाँट कर खाओ।

शुभ मुहूर्त और स्थान का महत्व

गुरु नानक जयंती की तिथि कार्तिक पूर्णिमा है। पूर्णिमा तिथि का निर्धारण चंद्र गणना के अनुसार होता है, जिस दिन पूर्णिमा तिथि सूर्योदय के समय विद्यमान हो, वही दिन गुरपुरब के मुख्य उत्सव का दिन माना जाता है। अखंड पाठ का भोग, प्रभात फेरी और नगर कीर्तन का समय प्रायः अमृत वेला (ब्रह्म-मुहूर्त, सूर्योदय से लगभग डेढ़ से दो घंटे पूर्व) से जोड़कर निश्चित किया जाता है, क्योंकि इस पवित्र समय में की गई आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है।

यही कारण है कि गुरपुरब के आयोजनों का सटीक समय, प्रभात फेरी, अखंड पाठ के भोग का क्षण और नगर कीर्तन का प्रस्थान, स्थानीय सूर्योदय पर आधारित होता है। भारत के पूर्वी और पश्चिमी भागों में सूर्योदय के समय में एक से दो घंटे तक का अंतर हो सकता है, और विदेशों में यह अंतर और भी अधिक होता है। इसलिए IST (भारतीय मानक समय) पर आधारित कोई एक समय सभी स्थानों के लिए सही नहीं होता, आपके शहर का सटीक स्थानीय समय नीचे दिया गया है।

गुरु नानक जयंती की रीति-रिवाज

गुरु नानक जयंती पर श्रद्धालु कई दिन पहले से ही तैयारियाँ शुरू कर देते हैं। पर्व से दो दिन पूर्व अखंड पाठ आरंभ होता है और जयंती के दिन भव्य आयोजनों के साथ यह पर्व अपने चरम पर पहुँचता है। मुख्य रीति-रिवाज इस प्रकार हैं:

  • अखंड पाठ: जयंती से 48 घंटे पूर्व गुरुद्वारों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का अखंड (निरंतर) पाठ आरंभ होता है, जो पर्व के दिन भोर में भोग (समापन) के साथ पूर्ण होता है।
  • प्रभात फेरी: पर्व से कई दिन पहले और जयंती की सुबह ब्रह्म-मुहूर्त में श्रद्धालु गुरबाणी के शबद गाते हुए नगर में प्रभात फेरी निकालते हैं, यह सुबह की पवित्र यात्रा मन को शांत और भक्तिमय बनाती है।
  • नगर कीर्तन: जयंती के दिन भव्य नगर कीर्तन निकाला जाता है जिसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को पालकी में सजाकर लाया जाता है, पंज प्यारे आगे चलते हैं और संगत कीर्तन करती हुई साथ चलती है।
  • गुरुद्वारे में अरदास और कीर्तन: दिनभर गुरुद्वारों में कीर्तन, कथा और अरदास होती है। श्रद्धालु माथा टेकते हैं और गुरु जी के जीवन पर आधारित प्रवचन सुनते हैं।
  • लंगर: गुरु नानक देव जी की सेवा की परंपरा को जीवित रखते हुए गुरुद्वारों में निःशुल्क लंगर (सामूहिक भोजन) परोसा जाता है, जिसमें जाति, धर्म या आर्थिक स्थिति का कोई भेद नहीं होता।
  • दीप प्रज्वलन और सजावट: कार्तिक पूर्णिमा की रात गुरुद्वारों और घरों को दीपों, मोमबत्तियों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है, जो गुरु जी के ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक है।
  • सेवा और दान: इस दिन श्रद्धालु स्वयंसेवक बनकर सफाई, लंगर पकाने और वितरण जैसी कार सेवा करते हैं और जरूरतमंदों को दान देते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरु नानक जयंती और गुरपुरब में क्या अंतर है?

दोनों एक ही पर्व के नाम हैं। "गुरपुरब" का अर्थ है गुरु से जुड़ा पावन दिन, और गुरु नानक देव जी के जन्म दिवस को विशेष रूप से "गुरु नानक गुरपुरब" या "गुरु नानक जयंती" कहा जाता है।

अखंड पाठ कितने घंटे का होता है और इसे कौन कर सकता है?

अखंड पाठ लगातार 48 घंटे चलता है जिसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का संपूर्ण पाठ होता है; इसे प्रशिक्षित पाठी करते हैं और कोई भी श्रद्धालु सुनने व सेवा में भाग ले सकता है।

क्या गैर-सिख लोग गुरुद्वारे में दर्शन और लंगर में भाग ले सकते हैं?

बिल्कुल, गुरुद्वारे सभी धर्मों और जातियों के लोगों के लिए खुले हैं; सिर ढककर और जूते उतारकर अंदर जाएँ, और लंगर में सभी समान रूप से भोजन ग्रहण कर सकते हैं।

इस दिन घर पर कौन सी सरल पूजा या अभ्यास किया जा सकता है?

घर पर गुरबाणी के शबद सुनें या गाएँ, गुरु नानक देव जी की वाणी का पाठ करें, दीप जलाएँ और किसी जरूरतमंद को भोजन या दान देकर सेवा की भावना को जीवित करें।

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