गुड़ी पड़वा (महाराष्ट्र में) और उगादि (आंध्र प्रदेश व कर्नाटक में) हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। यही तिथि हिंदू नववर्ष का प्रथम दिन मानी जाती है, वह क्षण जब सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी ने इस जगत की रचना आरंभ की थी। इस दिन से वसंत ऋतु अपने पूर्ण यौवन पर होती है और प्रकृति नई ऊर्जा से भर उठती है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम ने वनवास से लौटने पर इसी तिथि को अयोध्या में विजय का उत्सव मनाया था। एक अन्य कथा के अनुसार छत्रपति शिवाजी महाराज की विजय के उपलक्ष्य में प्रजा ने घरों के बाहर गुड़ी (विजय पताका) फहराकर अपनी खुशी व्यक्त की थी। यही परंपरा आज भी गुड़ी के रूप में जीवित है।
यह पर्व केवल नए वर्ष का स्वागत भर नहीं है, यह जीवन में नई शुरुआत, विजय, समृद्धि और आरोग्य का प्रतीक है। इस दिन किए गए शुभ कार्य, नए संकल्प और ईश्वर-स्मरण पूरे वर्ष के लिए मंगलकारी माने जाते हैं।