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सिंगापुर में दीपावली 2026

रविवार, 8 नवंबर 2026 · Amavasya

📅 Singapore में इस दिन का समय

गणना हो रही है…

Singapore के अक्षांश/देशांतर से गणना — IST नहीं

सिंगापुर, सिंगापुर में दीपावली 2026 रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। सिंगापुर का समय भारत से 2 घंटे 30 मिनट आगे है, इसलिए यहाँ के स्थानीय सूर्योदय के अनुसार इस दिन के शुभ मुहूर्त, जैसे लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, चौघड़िया और बचने योग्य राहु काल, भारतीय (IST) पंचांग में दिखाए गए समय से अलग पड़ते हैं। इस पेज पर नीचे दिया गया हर समय सिंगापुर के अनुसार गणना किया गया है, ताकि आप पूजा, खरीदारी और उत्सव सही स्थानीय समय पर कर सकें, भारत के समय पर नहीं।

सिंगापुर के सेरांगून रोड पर, जहाँ श्री वीरमाकालीअम्मन और श्री श्रीनिवास पेरुमल मंदिर दीपों की रोशनी में नहाए रहते हैं, वहाँ नवंबर की उमस भरी हवा में चमेली के हार और ताज़े मुरुक्कू की खुशबू मिलकर एक अलग ही उत्सव का एहसास जगाती है।

तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश या केरल से पीढ़ियों पहले आए परिवारों के लिए यहाँ की दीवाली में एक मीठी कसक होती है, HDB के गलियारे में सजी LED रंगोली चेन्नई की किसी दादी के आँगन की याद दिला देती है, और मंदिरों में होने वाले भजन संध्या उस घर से दूरी के दर्द को सामूहिक उष्मा और साझी यादों से भर देते हैं।

दीपावली का महत्व

दीपावली, जिसे 'दीपों का त्योहार' भी कहते हैं, कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश की, अज्ञान पर ज्ञान की और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीराम चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण कर माता सीता और लक्ष्मण सहित अयोध्या लौटे थे, और नगरवासियों ने उनके स्वागत में दीपमाला से पूरी नगरी को जगमग कर दिया था।

इस पर्व का एक अन्य महत्त्वपूर्ण आयाम माँ लक्ष्मी की उपासना से जुड़ा है। शास्त्रों के अनुसार कार्तिक अमावस्या की रात्रि को देवी लक्ष्मी स्वयं भ्रमण करती हैं और जो घर स्वच्छ, प्रकाशित तथा भक्तिपूर्ण होता है, वहाँ वे स्थायी रूप से निवास करती हैं। इसीलिए इस रात लक्ष्मी पूजन को सर्वाधिक महत्त्व दिया जाता है।

दीपावली केवल एक दिन का पर्व नहीं, बल्कि पाँच दिनों का महापर्व है, धनतेरस से लेकर भाई दूज तक। यह पर्व समाज में उल्लास, पारिवारिक एकजुटता और कृतज्ञता का भाव जागृत करता है। दीपक जलाना इस बात का संकल्प है कि हम अपने भीतर और अपने आसपास के अंधकार को मिटाते रहेंगे।

शुभ मुहूर्त — और Singapore में समय अलग क्यों

दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का लगभग 2 घड़ी = 48 मिनट का आरंभिक रात्रिकाल) और अमावस्या तिथि के संयोग से निर्धारित होता है, इसे प्रदोष-कालीन अमावस्या कहते हैं। इस काल में यदि स्थिर लग्न (विशेषतः वृष या सिंह लग्न) भी उपस्थित हो, तो वह समय सर्वोत्तम माना जाता है, क्योंकि 'स्थिर' लग्न में की गई लक्ष्मी पूजा से धन-समृद्धि घर में स्थायी रूप से टिकती है, ऐसा शास्त्रमत है। यदि प्रदोष काल में भद्रा हो, तो भद्रा की समाप्ति की प्रतीक्षा करना उचित होता है और भद्रामुख में पूजन वर्जित है।

यह मुहूर्त स्थानीय सूर्यास्त के समय पर पूरी तरह निर्भर करता है, इसलिए एक ही तिथि पर अलग-अलग स्थानों पर पूजा का सटीक समय भिन्न होता है। उदाहरण के लिए, जब पश्चिमी भारत में सूर्यास्त पूर्वी भारत से लगभग 30–45 मिनट बाद होता है, तो प्रदोष काल भी उतना ही पीछे खिसक जाता है। इसी कारण IST (भारतीय मानक समय) पर आधारित एकल समय विदेशों में, या भारत के भिन्न छोरों पर भी, सही नहीं होता। सटीक मुहूर्त सदैव अपने स्थान के अक्षांश-देशांतर और स्थानीय सूर्यास्त के आधार पर ही देखना चाहिए।

दीपावली की रीति-रिवाज

दीपावली की संध्या को विधिपूर्वक लक्ष्मी पूजन करना इस पर्व का केंद्रीय अनुष्ठान है। घर-घर में यह पूजा श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न की जाती है। नीचे दिए गए मुख्य चरण अधिकांश परिवारों द्वारा परंपरागत रूप से अपनाए जाते हैं,

  • घर की सफाई एवं सजावट: पूजा से पूर्व घर को पूरी तरह स्वच्छ किया जाता है, मुख्य द्वार पर रंगोली बनाई जाती है और तोरण-बंदनवार लगाए जाते हैं, ताकि माँ लक्ष्मी के स्वागत का वातावरण तैयार हो।
  • दीपक प्रज्वलन: मिट्टी के दीपकों में शुद्ध घी या तिल का तेल डालकर घर के हर कोने, दरवाज़े, खिड़कियाँ और छत पर दीप जलाए जाते हैं, अमावस्या की रात को रोशनी से भर देना इस पर्व की आत्मा है।
  • लक्ष्मी-गणेश स्थापना: पूजा स्थल पर माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र को लाल वस्त्र पर स्थापित किया जाता है; साथ में कुबेर देव का भी स्मरण किया जाता है।
  • षोडशोपचार पूजन: आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, चंदन, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि सोलह उपचारों से माँ लक्ष्मी की विधिवत पूजा की जाती है।
  • लक्ष्मी मंत्र एवं आरती: "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद" जैसे मंत्रों का जाप और लक्ष्मी आरती, "जय लक्ष्मी माता", पूजा का अभिन्न अंग है।
  • व्यापार-बही एवं तिजोरी पूजन: व्यापारी वर्ग इस दिन अपनी नई खाता-बही, तिजोरी और व्यावसायिक उपकरणों की पूजा करते हैं और नए वित्तीय वर्ष का शुभारम्भ करते हैं।
  • प्रसाद वितरण एवं पटाखे: पूजन के बाद मिठाई और प्रसाद परिवार व पड़ोसियों में बाँटा जाता है, और परंपरागत रूप से पटाखे जलाकर उत्सव का आनंद लिया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीपावली किस तिथि को मनाई जाती है?

दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है, जो हिंदू पंचांग के अनुसार प्रतिवर्ष अलग-अलग अंग्रेज़ी तारीख पर पड़ती है।

लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे अच्छा समय कौन सा है?

प्रदोष काल (सूर्यास्त के तुरंत बाद) में अमावस्या तिथि के दौरान, विशेषकर स्थिर लग्न (जैसे वृष लग्न) में लक्ष्मी पूजन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

क्या दीपावली पर सिर्फ लक्ष्मी जी की पूजा होती है?

नहीं, लक्ष्मी पूजन के साथ-साथ भगवान गणेश, कुबेर देव और कई क्षेत्रों में माँ काली की भी पूजा की परंपरा है; व्यापारी वर्ग खाता-बही पूजन भी करता है।

क्या विदेश में रहने वाले भारतीय भारतीय समय (IST) से मुहूर्त देख सकते हैं?

नहीं, मुहूर्त स्थानीय सूर्यास्त पर आधारित होता है; विदेश में या भारत के किसी भी शहर में सटीक समय के लिए उस स्थान का स्थानीय पंचांग या स्थान-आधारित मुहूर्त कैलकुलेटर ही उपयोग करें।

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