दीपावली, जिसे 'दीपों का त्योहार' भी कहते हैं, कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश की, अज्ञान पर ज्ञान की और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीराम चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण कर माता सीता और लक्ष्मण सहित अयोध्या लौटे थे, और नगरवासियों ने उनके स्वागत में दीपमाला से पूरी नगरी को जगमग कर दिया था।
इस पर्व का एक अन्य महत्त्वपूर्ण आयाम माँ लक्ष्मी की उपासना से जुड़ा है। शास्त्रों के अनुसार कार्तिक अमावस्या की रात्रि को देवी लक्ष्मी स्वयं भ्रमण करती हैं और जो घर स्वच्छ, प्रकाशित तथा भक्तिपूर्ण होता है, वहाँ वे स्थायी रूप से निवास करती हैं। इसीलिए इस रात लक्ष्मी पूजन को सर्वाधिक महत्त्व दिया जाता है।
दीपावली केवल एक दिन का पर्व नहीं, बल्कि पाँच दिनों का महापर्व है, धनतेरस से लेकर भाई दूज तक। यह पर्व समाज में उल्लास, पारिवारिक एकजुटता और कृतज्ञता का भाव जागृत करता है। दीपक जलाना इस बात का संकल्प है कि हम अपने भीतर और अपने आसपास के अंधकार को मिटाते रहेंगे।