बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध और हिंदू दोनों परंपराओं का एक अत्यंत पवित्र पर्व है। वैशाख माह की पूर्णिमा तिथि को भगवान गौतम बुद्ध का जन्म, बोधगया में उनका महाबोध (ज्ञान प्राप्ति) और कुशीनगर में उनका महापरिनिर्वाण, ये तीनों घटनाएँ घटित हुई थीं। इसी अद्भुत संयोग के कारण यह तिथि तीन गुना पवित्र मानी जाती है।
हिंदू धर्म में भगवान बुद्ध को विष्णु के दशावतारों में नौवाँ अवतार माना जाता है, इसलिए यह पर्व वैष्णव परंपरा में भी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। वैशाख पूर्णिमा का स्नान, दान और ध्यान विशेष फलदायी माना जाता है, मान्यता है कि इस दिन किया गया पुण्य अन्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़कर फल देता है।
बुद्ध का संदेश था, अहिंसा, करुणा और मध्यम मार्ग। इस दिन उनकी शिक्षाओं का स्मरण करते हुए मन को शांत करना, दूसरों की सहायता करना और आत्मचिंतन करना इस पर्व का मूल भाव है। यह केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आंतरिक जागरण का अवसर है।