बुधवार, 11 नवंबर 2026 नई दिल्ली के लिए इस लेख की संदर्भ तारीख है। नीचे दिया समय केवल नई दिल्ली, भारत (IST, UTC+5:30) के लिए है। दूसरे शहर या विदेश में यही समय लागू न मानें।

नई दिल्ली का संदर्भ समय

दोपहर 1:10–3:20 बजे IST

भाई दूज के लिए यह दोपहर का तिलक समय है। तारीख और समय का स्रोत (जांच: 27 अक्टूबर 2026).

यात्रा से पहले तारीख तय करें

नई दिल्ली के लिए भाई दूज 11 नवंबर 2026 को है। संदर्भ में तिलक के लिए नीचे दिया दोपहर का समय है। द्वितीया 10 नवंबर दोपहर 2:00 बजे शुरू होकर 11 नवंबर दोपहर 3:53 बजे IST पर समाप्त होती है। पूरी तिथि की अवधि और दोपहर के अनुशंसित तिलक समय में अंतर है। अलग शहरों में रहने वाले भाई-बहन कार्यक्रम तय करते समय तारीख और शहर दोनों लिखें।

थाली सरल और तैयार रखें

घर की परंपरा के अनुसार तिलक सामग्री, उपयोग होता हो तो छोटा दीपक, फूल और मिठाई या प्रचलित प्रसाद रखें। दोहरी खरीदारी से पहले घर की सामग्री जांच लें। दीपक स्थिर जगह रखें और सबके आराम से बैठने का स्थान बनाएं। प्रार्थना, तिलक और आरती का अपना पारिवारिक क्रम अपनाएं; एक ऑनलाइन सूची सभी क्षेत्रों का विधान नहीं बताती।

रिश्ते के लिए समय निकालें

भाई दूज पर साथ बैठना और एक-दूसरे का हाल पूछना भी महत्वपूर्ण है। साझा भोजन, बातचीत या स्नेहपूर्ण संदेश आयोजन को व्यक्तिगत बना सकता है। उपहार परिवार के बजट के अनुसार साधारण भी हो सकते हैं। किसी खास उपहार को जरूरी बताना या खरीदारी की तुलना करना आवश्यक नहीं है।

दूर रहने वाले परिवार

सबके अनुकूल वीडियो कॉल तय करें, लेकिन सामाजिक बातचीत और स्थानीय समय पर होने वाले अनुष्ठान का अंतर समझें। दोनों घर अनुष्ठान करते हों तो अपने-अपने स्थान का पंचांग देखें। कॉल के निमंत्रण में समय क्षेत्र लिख देने से भ्रम कम होता है। यात्रा मुश्किल हो तो पहले ही तय करें कि परिवार यह दिन कैसे मनाएगा, ताकि अंतिम समय की जल्दबाजी न हो।

अंतिम सूची

शहर, तिलक समय, भोजन और यात्रा करने वालों की पुष्टि करें। पूरी व्यावहारिक योजना एक संदेश में भेजें ताकि बड़े-बुजुर्ग कई विरोधाभासी संदेश न छांटते रहें। थाली सजाने और आराम से बैठने का समय रखें। क्षेत्रीय परंपराएं अलग होती हैं; घर के बड़ों या पुरोहित से अपनी विधि स्पष्ट कर लें।

अपने शहर का पंचांग देखें

CosmosPandit के वेब ऐप में अपना शहर और संबंधित तारीख चुनकर पंचांग देखें। शहर सही चुना है या नहीं, यह जांच लें। परिवार के विशेष अनुष्ठान का समय स्पष्ट न हो तो स्थानीय मंदिर या पुरोहित से पूछें। दिल्ली के घड़ी समय को केवल समय क्षेत्र बदलकर स्थानीय पूजा का मुहूर्त न मानें।

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