भाई दूज हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व भाई और बहन के पवित्र प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करती हैं।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना (यमी) के घर गए थे। यमुना ने अपने भाई का आदर-सत्कार किया, उनके माथे पर तिलक लगाया और उन्हें भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के हाथों तिलक ग्रहण करेगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। इसीलिए इस पर्व को "यम द्वितीया" भी कहते हैं।
भाई दूज दीपावली के उत्सव की समाप्ति का पर्व भी माना जाता है और यह भाई-बहन के उस अटूट बंधन का उत्सव है जो रक्षाबंधन की भावना को वर्ष में एक बार और नवीन करता है। इस पर्व में बहन की भूमिका केंद्रीय होती है, उसकी दुआ और तिलक ही इस पर्व की आत्मा है।