बसंत पंचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। यह पर्व ऋतुराज बसंत के आगमन का उत्सव है, जब प्रकृति पीले सरसों के फूलों से सज उठती है, वायु में मिठास घुल जाती है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। इसीलिए इसे "श्री पंचमी" या "सरस्वती पंचमी" भी कहते हैं।
इस दिन ज्ञान, कला, संगीत और वाणी की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की विशेष आराधना की जाती है। पौराणिक मान्यता है कि इसी तिथि को ब्रह्माजी ने सृष्टि-रचना के पश्चात माँ सरस्वती को प्रकट किया था, जिन्होंने अपनी वीणा की झंकार से समस्त जगत को वाणी, संगीत और चेतना का वरदान दिया।
बसंत पंचमी को विद्यारंभ संस्कार के लिए वर्ष का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है। बच्चों को पहली बार अक्षर-ज्ञान कराना, नया वाद्य-यंत्र छूना, या विद्या का कोई नया क्षेत्र प्रारंभ करना, इन सभी के लिए यह तिथि अत्यंत शुभ और फलदायी मानी गई है।