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अक्षय तृतीया 2027

शनिवार, 8 मई 2027 · Tritiya

अक्षय तृतीया 2027 शनिवार, 8 मई 2027 को है। इस पेज पर आपको अक्षय तृतीया का महत्व, परिवारों द्वारा की जाने वाली रीति-रिवाज, खरीदारी मुहूर्त कैसे तय होता है, और आम सवालों के जवाब मिलेंगे। चूँकि शुभ समय स्थानीय सूर्योदय पर निर्भर करता है, इसलिए हम दुनिया भर के प्रमुख शहरों की स्थानीय तिथि और मुहूर्त भी देते हैं, ताकि विदेश में रहने वाले भारतीयों को अपने शहर का सही समय मिले, भारत के IST का नहीं।

अक्षय तृतीया का महत्व

अक्षय तृतीया वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला एक अत्यंत पवित्र और मंगलकारी पर्व है। "अक्षय" का अर्थ है जो कभी क्षीण न हो, इसलिए इस दिन किए गए दान, जप, पूजा और नए शुभ कार्यों का फल अविनाशी माना जाता है। पुराणों के अनुसार इसी तिथि को भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म हुआ था, और त्रेतायुग का आरंभ भी इसी पुण्य दिन से माना जाता है।

महाभारत की कथा में इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को अक्षय पात्र प्रदान किया था, जिससे कभी अन्न समाप्त नहीं होता था। मान्यता है कि माँ गंगा का धरती पर अवतरण भी अक्षय तृतीया को हुआ था। इन असंख्य पौराणिक संदर्भों के कारण यह तिथि हिंदू धर्म में स्वयंसिद्ध मुहूर्त, अर्थात बिना किसी अलग मुहूर्त-गणना के शुभ, मानी जाती है।

इस दिन सोना, चाँदी या संपत्ति खरीदना विशेष रूप से शुभ माना जाता है, क्योंकि अक्षय तृतीया पर अर्जित धन और समृद्धि में निरंतर वृद्धि होती है। नया व्यवसाय आरंभ करना, गृह प्रवेश, विवाह और अन्य मांगलिक कार्य भी इस दिन धड़ल्ले से किए जाते हैं, पूरा दिन शुभता से भरपूर रहता है।

शुभ मुहूर्त और स्थान का महत्व

अक्षय तृतीया को "स्वयंसिद्ध मुहूर्त" कहा जाता है, अर्थात इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की अलग से गणना किए बिना भी पूरा दिन शुभ कार्यों के लिए उत्तम रहता है। तकनीकी रूप से मुहूर्त की अवधि वह समय होती है जब वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि सक्रिय हो, यह तिथि जब तक रहे, तब तक सोना खरीदना, विवाह, गृह प्रवेश या नया कार्य आरंभ करना निर्बाध रूप से शुभ है। यदि तृतीया तिथि अगले दिन भी सूर्योदय तक बनी रहे, तो वह दिन भी अक्षय तृतीया के रूप में मान्य होता है।

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि तिथि का आरंभ और समापन स्थानीय सूर्योदय के अनुसार बदलता है, इसलिए IST (भारतीय मानक समय) पर आधारित एक ही समय सारणी विश्व के हर स्थान के लिए सही नहीं होती। उदाहरण के लिए, यदि आप भारत से बाहर किसी अन्य समय क्षेत्र में हैं, तो वहाँ का सूर्योदय अलग समय पर होगा और तदनुसार तृतीया तिथि का शुभ काल भी अलग होगा। इसीलिए अपने स्थान के सटीक सूर्योदय समय के आधार पर स्थानीय पंचांग से मुहूर्त जानना सर्वोत्तम रहता है।

अक्षय तृतीया की रीति-रिवाज

अक्षय तृतीया पर परिवार प्रातःकाल से ही पूजा-अर्चना और शुभ कार्यों में जुट जाते हैं। इस दिन के प्रमुख अनुष्ठान इस प्रकार हैं:

  • स्नान और संकल्प: सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र स्नान करें और इस दिन के पुण्य का लाभ उठाने का संकल्प लें। गंगाजल मिलाकर स्नान करना विशेष फलदायी माना जाता है।
  • भगवान विष्णु की पूजा: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें, पीले फूल, तुलसी दल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। परशुराम जयंती होने के कारण परशुराम जी की भी पूजा की जाती है।
  • सत्तू और जल का दान: इस दिन जल, सत्तू (भुने चने का आटा), ककड़ी, पंखा और वस्त्र का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन कराना विशेष फल देता है।
  • सोना-चाँदी या नई वस्तु की खरीद: इस दिन सोना, चाँदी, आभूषण, बर्तन या कोई नई संपत्ति खरीदने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तु में अक्षय वृद्धि होती है।
  • नए कार्य का शुभारंभ: नया व्यवसाय, दुकान, खाता-बही (बही-खाता) अथवा कोई बड़ा प्रोजेक्ट इस दिन आरंभ करना बेहद शुभ माना जाता है, किसी अतिरिक्त मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती।
  • पितृ तर्पण: पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए जल-तर्पण और पिंडदान करने की भी परंपरा है। इस दिन किया गया तर्पण अक्षय फल देता है।
  • व्रत और भजन-कीर्तन: कुछ श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं और सायंकाल भजन, कीर्तन एवं विष्णु सहस्रनाम के पाठ के साथ दिन का समापन करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना क्यों शुभ माना जाता है?

"अक्षय" का अर्थ है कभी न घटने वाला, इस दिन खरीदे गए सोने या किसी भी मूल्यवान वस्तु में निरंतर वृद्धि और समृद्धि होती है, ऐसी शास्त्रीय मान्यता है। इसलिए इस दिन सोना खरीदना सौभाग्य और अक्षय धन का प्रतीक बन गया है।

क्या अक्षय तृतीया पर अलग से मुहूर्त देखना जरूरी है?

नहीं। अक्षय तृतीया स्वयंसिद्ध मुहूर्त है, यानी पूरा दिन स्वतः शुभ होता है। जब तक वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि सक्रिय है, किसी भी समय शुभ कार्य आरंभ किया जा सकता है, किसी ज्योतिषीय गणना की अतिरिक्त आवश्यकता नहीं।

इस दिन कौन-कौन से शुभ कार्य किए जा सकते हैं?

अक्षय तृतीया पर विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय आरंभ, वाहन खरीद, भूमि-संपत्ति की खरीद, और किसी भी बड़े मांगलिक कार्य का शुभारंभ किया जा सकता है। इस दिन किए गए सभी शुभ कार्य अक्षय फल देते हैं।

अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती में क्या संबंध है?

वैशाख शुक्ल तृतीया को ही भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था, इसलिए यही तिथि परशुराम जयंती के रूप में भी मनाई जाती है। अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती एक ही दिन पड़ती हैं।

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