अक्षय तृतीया वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला एक अत्यंत पवित्र और मंगलकारी पर्व है। "अक्षय" का अर्थ है जो कभी क्षीण न हो, इसलिए इस दिन किए गए दान, जप, पूजा और नए शुभ कार्यों का फल अविनाशी माना जाता है। पुराणों के अनुसार इसी तिथि को भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म हुआ था, और त्रेतायुग का आरंभ भी इसी पुण्य दिन से माना जाता है।
महाभारत की कथा में इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को अक्षय पात्र प्रदान किया था, जिससे कभी अन्न समाप्त नहीं होता था। मान्यता है कि माँ गंगा का धरती पर अवतरण भी अक्षय तृतीया को हुआ था। इन असंख्य पौराणिक संदर्भों के कारण यह तिथि हिंदू धर्म में स्वयंसिद्ध मुहूर्त, अर्थात बिना किसी अलग मुहूर्त-गणना के शुभ, मानी जाती है।
इस दिन सोना, चाँदी या संपत्ति खरीदना विशेष रूप से शुभ माना जाता है, क्योंकि अक्षय तृतीया पर अर्जित धन और समृद्धि में निरंतर वृद्धि होती है। नया व्यवसाय आरंभ करना, गृह प्रवेश, विवाह और अन्य मांगलिक कार्य भी इस दिन धड़ल्ले से किए जाते हैं, पूरा दिन शुभता से भरपूर रहता है।