कैलेंडर में चार तारीखें लिखें

इस गाइड के भारतीय संदर्भ स्थानों के लिए छठ 2026 शुक्रवार, 13 नवंबर से सोमवार, 16 नवंबर तक है। नहाय-खाय 13 नवंबर, खरना 14 नवंबर, संध्या अर्घ्य 15 नवंबर और उषा अर्घ्य 16 नवंबर को है। किसी सूची में “छठ पूजा: 15 नवंबर” लिखा हो तो वह मुख्य शाम के अनुष्ठान की तारीख है; पूरे पर्व को एक दिन का न मानें।

शाम और सुबह के अर्घ्य की तारीख अलग है

नीचे संध्या अर्घ्य के लिए 15 नवंबर का सूर्यास्त और उषा अर्घ्य के लिए 16 नवंबर का सूर्योदय दिया है। सभी घड़ी समय संबंधित शहर के IST यानी UTC+5:30 में हैं। ये खगोलीय संदर्भ क्षण हैं जिनके आसपास अनुष्ठान आयोजित किया जाता है; इसका अर्थ पूरी विधि को ठीक एक मिनट में पूरा करना नहीं है। परिवार की परंपरा और निर्धारित स्थल के निर्देशों का पालन करें।

शहर15 नवंबर सूर्यास्त (IST)16 नवंबर सूर्योदय (IST)
पटना5:01 PM6:07 AM
नई दिल्ली5:28 PM6:44 AM

हर शहर के नाम पर उसके स्रोत का लिंक है। जांच: 27 अक्टूबर 2026।

नहाय-खाय और खरना की पारिवारिक योजना

छठ में सूर्य देव और छठी मैया की आराधना की जाती है तथा परिवार और समुदाय सहयोग करते हैं। घर में आयोजन संभालने वाले अनुभवी व्यक्ति से रसोई, प्रसाद और पूजा स्थल की तैयारी पूछें। पहले दो दिनों के भोजन तथा तैयारी का क्रम घाट जाने की योजना से अलग लिखें। यह गाइड सभी के लिए उपवास, एक जैसा मेनू या नई विधि निर्धारित नहीं करती; सहयोग करने वाले परिवारजनों का काम व्यवस्थित करती है।

सामग्री: खरीदारी से पहले घर की सूची पूछें

कई घरों में सूप या टोकरी, फल, नारियल, गन्ना और ठेकुआ जैसे प्रचलित घर के प्रसाद तैयार होते हैं। सही सामग्री और मात्रा अपने परिवार की विधि से तय करें। उपलब्ध बर्तन और दोबारा इस्तेमाल होने वाले डिब्बे जांचें, फिर लोगों की संख्या के अनुसार सूची बनाएं। साफ तैयारी सामग्री एक जगह रखें और खरीदने, बनाने, पैक करने तथा ले जाने का काम बांटें। किसी महंगी वस्तु को अनिवार्य बताना जरूरी नहीं है।

घाट की व्यवस्था पहले जान लें

स्थानीय आयोजक से स्थल, पहुंचने का रास्ता, निर्धारित आगमन समय और वापसी के साधन पूछें। घाट पर जमा होने का समय नीचे दिए सूर्य संदर्भ से पहले हो सकता है। मौके के आधिकारिक निर्देश मानें और चिह्नित क्षेत्र में रहें; तस्वीर के लिए गहरे पानी में न उतरें या अवरोध न पार करें। मिलने का स्थान तय रखें और बच्चों तथा सहायता चाहने वाले परिजनों के साथ रहें। पैकिंग और कचरा पानी के पास छोड़ने के बजाय निर्धारित संग्रह स्थल पर रखें।

सुबह की यात्रा की तैयारी अलग रखें

उषा अर्घ्य 16 नवंबर को है, संध्या अर्घ्य वाले दिन की सुबह नहीं। यात्रा और प्रवेश के लिए पर्याप्त समय वाला अलार्म लगाएं। जरूरी सामान पहले पैक करें, अंधेरे रास्ते के लिए टॉर्च रखें और सोने से पहले वाहन की पुष्टि करें। सही तारीख, शहर और मिलने का स्थान एक संदेश में लिखें ताकि कोई पुराने स्क्रीनशॉट का समय न माने।

आपका शहर तालिका में न हो तो

परिवार बिहार का होने से पटना का समय दूसरे शहर में लागू न करें। दिल्ली के घड़ी समय को दूसरे समय क्षेत्र में बदलना भी स्थानीय गणना नहीं है। जहां अनुष्ठान करेंगे, संदर्भ वहीं का होना चाहिए। CosmosPandit वेब ऐप में अपना वर्तमान शहर चुनें; सूर्यास्त के लिए 15 नवंबर और सूर्योदय के लिए 16 नवंबर देखें। सामुदायिक आयोजन हो तो स्थानीय कार्यक्रम भी पूछें। भारत की इस तालिका से विदेश की पर्व तारीख निर्धारित नहीं की गई है।

तैयारी और सहभागिता पर ध्यान रखें

स्पष्ट योजना से प्रार्थना, पारिवारिक सहयोग और शांत आयोजन के लिए अधिक समय मिलता है। जिम्मेदारियां पहले बांटें और घर की परंपरा निभाने वाले अनुभवी लोगों से विधि समझें। तारीख और समय योजना के संदर्भ हैं, किसी परिणाम की गारंटी नहीं। जुड़े हुए शहर कैलेंडर 27 अक्टूबर 2026 को जांचे गए; पर्व के पास स्थानीय आयोजन की व्यवस्था दोबारा पूछ लें।

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