अपने शहर का राहु काल कैसे निकालें (चरण-दर-चरण)
राहु काल कोई याद रखने योग्य निश्चित समय नहीं है। यह हर दिन आपके शहर के लिए नए सिरे से गणना होती है। बहुत से लोग सोचते हैं कि रविवार को दोपहर बाद 4:30 से 6:00 बजे तक राहु काल होता है और यही समय हर हफ्ते चलता रहेगा। यह सोच गलत है। असली राहु काल आपके शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर करता है, जो हर दिन बदलते हैं, हर शहर में अलग होते हैं, और हर मौसम के साथ खिसकते रहते हैं। आइए ठीक-ठीक सीखें कि इसे स्वयं कैसे निकालें, ताकि आप किसी भी दिन, किसी भी शहर में सही राहु काल जान सकें।
राहु काल क्यों महत्वपूर्ण है
वैदिक ज्योतिष में राहु काल उस समय खंड को कहते हैं जिसमें राहु ग्रह का प्रभाव प्रबल माना जाता है। इस समय में नए काम शुरू करना, यात्रा पर निकलना, विवाह, गृह प्रवेश, व्यापारिक समझौते या किसी भी शुभ कार्य का आरंभ वर्जित माना जाता है। इसका अर्थ यह नहीं कि राहु काल में सब कुछ बंद कर दें। दैनिक काम, नौकरी, भोजन सब चलता रहता है। बस नए शुभ कार्यों का मुहूर्त इस समय से बचाया जाता है।
तीन चरण
राहु काल निकालने की विधि सरल है, बस तीन चरण हैं और इन्हें एक बार समझ लेने के बाद आप किसी भी दिन के लिए यह गणना खुद कर सकते हैं।
- पहला चरण, अपना स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त लें। ये आपके शहर के अक्षांश और देशांतर पर निर्भर हैं, इसलिए अपने सटीक स्थान का समय लें, IST नहीं। मुंबई और कोलकाता का सूर्योदय एक जैसा नहीं होता। यदि आप IST का समय लेंगे तो राहु काल गलत निकलेगा।
- दूसरा चरण, दिन को आठ बराबर भागों में बाँटें। सूर्यास्त में से सूर्योदय घटाकर दिन की कुल लंबाई निकालें, फिर उसे 8 से भाग दें। यही प्रत्येक भाग की लंबाई है और इसी लंबाई का राहु काल भी होता है।
- तीसरा चरण, आज के वार का भाग चुनें, नीचे दी तालिका से। हर वार के लिए एक निश्चित भाग तय है, वही राहु काल बनता है।
वार तालिका
- रविवार: आठवाँ भाग
- सोमवार: दूसरा भाग
- मंगलवार: सातवाँ भाग
- बुधवार: पाँचवाँ भाग
- गुरुवार: छठा भाग
- शुक्रवार: चौथा भाग
- शनिवार: तीसरा भाग
एक विस्तृत उदाहरण, पूरी गणना के साथ
मान लीजिए आप जयपुर में रहते हैं और आज सोमवार है। आपके शहर में आज सूर्योदय प्रातः 6:00 बजे और सूर्यास्त सायं 6:24 बजे है। दिन की कुल लंबाई 12 घंटे 24 मिनट यानी 744 मिनट है। इसे 8 से भाग देने पर प्रत्येक भाग 93 मिनट का बनता है।
अब तालिका देखते हैं। सोमवार के लिए दूसरा भाग राहु काल है। पहला भाग 6:00 से 7:33 तक चलता है। तो दूसरा भाग, यानी राहु काल, प्रातः 7:33 से 9:06 बजे तक है। यदि आप उसी सोमवार को किसी नई दुकान का उद्घाटन करना चाहते थे तो इस समय को छोड़कर मुहूर्त चुनना सही रहेगा।
अब उसी जयपुर में अगर शनिवार हो, तो तीसरा भाग राहु काल होगा। पहला भाग 6:00 से 7:33, दूसरा भाग 7:33 से 9:06, और तीसरा भाग यानी राहु काल 9:06 से 10:39 बजे तक होगा। देखिए, एक ही शहर में, लगभग एक जैसे सूर्योदय पर भी, केवल वार बदलने से राहु काल का समय पूरी तरह बदल गया।
अब यदि यही गणना चेन्नई के लिए करें जहाँ उसी दिन सूर्योदय 6:15 और सूर्यास्त 6:10 हो, तो दिन की लंबाई अलग होगी, भाग की लंबाई अलग होगी, और राहु काल का समय जयपुर से भिन्न निकलेगा। यही कारण है कि IST पर आधारित कोई भी सामान्य तालिका आपके लिए पूरी तरह सटीक नहीं हो सकती।
कल का मान दोबारा क्यों नहीं चलेगा
सूर्योदय हर दिन थोड़ा बदलता है और पूरे वर्ष में बहुत अधिक बदल जाता है। जून में दिन लंबे होते हैं, दिसंबर में छोटे। इसलिए आठों भाग भी हर दिन खिसकते हैं। ऊपर से वार भी बदल देता है कि कौन-सा भाग चुना जाए। इसीलिए छपी हुई तालिका या IST आधारित ऐप प्रायः आपके लिए गलत होती है। यदि आप किसी महत्वपूर्ण काम का मुहूर्त निकाल रहे हैं तो रोज की गणना जरूरी है।
आसान रास्ता
यह रोज़ हाथ से करना थकाऊ है और व्यस्त जीवन में संभव भी नहीं। मुफ़्त CosmosPandit ऐप आपके सटीक शहर के लिए राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल और शुभ चोघड़िया स्वयं निकालता है। यह राहु काल शुरू होने से 15 मिनट पहले आपको सूचित करता है ताकि आप समय पर सतर्क रहें। यदि आप एक साथ दो शहरों की तुलना करना चाहते हैं, जैसे दिल्ली और बेंगलुरु में एक ही दिन का राहु काल देखना हो, तो आप दो शहरों की तुलना वाला टूल भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यह खासतौर पर तब काम आता है जब परिवार के दो सदस्य अलग-अलग शहरों में हों और दोनों एक ही शुभ समय में कोई काम शुरू करना चाहते हों।
Frequently Asked Questions
क्या रात के समय भी राहु काल होता है
पारंपरिक वैदिक ज्योतिष में राहु काल की गणना केवल दिन के समय, यानी सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच की जाती है। रात का समय इस गणना में शामिल नहीं होता। इसीलिए राहु काल की आठ भागों वाली विधि में हम केवल दिन की लंबाई लेते हैं, पूरे 24 घंटे नहीं। रात में किए जाने वाले कार्यों के लिए अन्य ज्योतिषीय विचार किए जाते हैं, जैसे चोघड़िया या होरा।
क्या राहु काल में पूजा या मंदिर जाना भी वर्जित है
राहु काल में नए शुभ कार्यों का आरंभ वर्जित माना जाता है, लेकिन नियमित पूजा, आरती, मंदिर दर्शन या भगवान के नाम का जप इस नियम में नहीं आते। बल्कि कुछ विद्वान राहु काल में राहु की शांति के लिए विशेष पूजा का सुझाव देते हैं। यदि आप किसी नई पूजा परंपरा या अनुष्ठान का पहली बार आरंभ करने की योजना बना रहे हैं, तो उसके लिए राहु काल से बचना उचित रहेगा।
अगर मेरे शहर और पास के शहर का राहु काल अलग हो तो किसे मानूँ
हमेशा अपने सटीक शहर का राहु काल मानें। वैदिक ज्योतिष में स्थानीय समय का बहुत महत्व है क्योंकि सूर्योदय और सूर्यास्त अक्षांश-देशांतर पर निर्भर करते हैं। यदि आप दिल्ली में हैं तो दिल्ली का समय लें, नोएडा या गुरुग्राम का नहीं। CosmosPandit ऐप में आप अपना सटीक शहर सेट कर सकते हैं और वह GPS आधारित स्थान से भी सही समय निकाल देता है। यदि दो शहरों की तुलना करनी हो तो तुलना टूल का उपयोग करें।